प्रकाश का परावर्तन/Reflection of light Physics Chapter 1 Subjective Questions and Answer//Class 10 physics Exercise 1 #manojsiraone #aonemotihari

      भौतिकी,पाठ:-1(Physics Chapter 1)

          प्रकाश का परावर्तन

         A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी

       Subjective Type Questions

1.प्रकाश(Light) क्या है? इसके क्या गुण है?


Ans:- प्रकाश वह भौतिक कारक है,जिसकी सहायता से हम किसी वस्तुओं को देखते है।  प्रकाश के निम्नलिखित गुण है :-


(i) प्रकाश एक उर्जा का रूप है।


(ii) यह एक विद्युत् चुम्बकीय तरंग है।

      (अनुप्रस्थ प्रकृति का)


(iii) प्रकाश सीधी रेखाओं में गमन करता है।


(iv)निर्वात में प्रकाश का वेग 3 × 108 m/s होता है।


(v) भिन्न-भिन्न प्रकाशीय माध्यमो में प्रकाश का वेग भी भिन्न-भिन्न होता है।

A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी,Manoj Sir 


2. प्रकाश के परावर्तन (Reflection of Light) से आप क्या समझते है ? इसके कितने नियम है ?


Ans:- प्रकाश के किसी वस्तु से टकरा कर लौटने की घटना को प्रकाश का परावर्तन           कहते है।


    प्रकाश के परावर्तन के दो नियम है :-


(i) आपतित किरण,परावर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर डाला गया अभिलंब तीनों एक ही समतल में होते है।


(ii) आपतन कोण,परावर्तन कोण के बराबर होता है।


 3. प्रतिबिंब से आप क्या समझते है? ये कितने प्रकार के होते है?


Ans:- किसी बिंदु स्रोत से आती प्रकाश की किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है,उसे उस बिंदु स्रोत का प्रतिबिंब कहते है।


     प्रतिबिंब दो प्रकार के होते है :-


(i) वास्तविक प्रतिबिंब (Real Image)


(ii) काल्पनिक या आभासी प्रतिबिंब (Virtual Image)

             A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी

4. वास्तविक प्रतिबिंब तथा काल्पनिक प्रतिबिंब में क्या अंतर है ?


Ans:- वास्तविक प्रतिबिंब तथा काल्पनिक प्रतिबिंब में निम्नलिखित अंतर है :-


वास्तविक प्रतिबिंब :- 


(i) यह वस्तु की अपेक्षा हमेशा उल्टा होता होता है।

(ii इसे पर्दे पर प्राप्त कर सकते है।

(iii) ये किरणों के वास्तविक कटान से बनता है।

(iv)यह दर्पण के आगे बनता है।


काल्पनिक या आभासी प्रतिबिंब :-


(i) यह वस्तु की अपेक्षा हमेशा सीधा होता है।


(ii) इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं कर सकते है।


(iii) ये किरणों के काल्पनिक कटान से बनता है।

(iv) यह दर्पण के पीछे बनता है।


5.  समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब की विशेषताओ को लिखे ।

A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी


Ans:- समतल दर्पण में बनने वाले प्रतिबिंब की निम्नलिखित विशेषताए है :-


(i) इसमें प्रतिबिंब दर्पण के पीछे बनता है।


(ii) इसमें प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।


(iii) प्रतिबिंब वस्तु की अपक्षा हमेशा सीधा बनता है।


(iv) इसमें वस्तु-दूरी तथा प्रतिबिंब-दूरी हमेशा बराबर होती है।


(v) प्रतिबिंब पार्श्विक रूप से उल्टा होता है।

(दायाँ-बायाँ का भ्रम)


(vi) इसमें बना प्रतिबिंब हमेशा काल्पनिक या आभासी होता है।


(vii) इसका आवर्धन(m) +1 होता है। 


(viii) इसकी फोकस-दूरी अनंत होती है।


(ix) यदि कोई वस्तु इसकी ओर V  वेग से आता है तो इसमें बनने वाला प्रतिबिंब 2V वेग (दुगुनी चाल) से आती हुई प्रतीत होगी।


(x) इसमें बनने वाले प्रतिबिंब को पर्दे पर प्राप्त नहीं कर सकते है।   A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी


6. प्रकाश के किरणपुंज (Beam of light) से आप क्या समझते है ? ये कितने प्रकार के होते है ?                      A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी


Ans:- प्रकाश की किरणों के समूह को प्रकाश का किरणपुंज कहते है।


   ये तीन प्रकार के होते है :-


(i) अपसारी किरणपुंज (Diverging beam of light)


(ii) अभिसारी किरणपुंज (Converging beam of light)


(iii) समांतर किरणपुंज (Parallel beam of light)


 Note:- अभिसारी (संसृत) का अर्थ एक बिंदु पर मिलना या सिकुड़ना होता है,जबकि अपसारी (अपसृत) का अर्थ एक बिंदु से विभिन्न दिशाओ में फैलना होता है।


 7.गोलीये दर्पण(Spherical mirror) से आप क्या समझते है ? ये कितने प्रकार के होते है ?


 Ans:- वैसे दर्पण जिसकी परावर्तक सतह किसी खोखले गोले (hollow sphere) का एक हिस्सा या भाग होता है,गोलीये दर्पण कहलाता है।

गोलीये दर्पण दो प्रकार के होते है :-


(i)अवतल दर्पण/अभिसारी दर्पण (Concave mirror)


(ii)उतल दर्पण/अपसारी दर्पण (Convex mirror)


8. अवतल दर्पण के मुख्य उपयोगो को बताएं।

           A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी


Ans:- अवतल दर्पण के निम्नलिखित उपयोग है :-


(i) रोगियों के नाक,कान,गले,दांत आदि की जाँच में

(ii) टॉर्च,वाहनों के हेडलाइट तथा सर्चलाइट में

(iii) हजामती दर्पण के रूप में

(iv) सौर भट्ठियों तथा सोलर कुकर में


9. अवतल दर्पण का उपयोग हजामती दर्पण के रूप में किया जाता है‌। क्यों ?


Ans:- अवतल दर्पण निकट रखी वस्तुओ का सीधा, बड़ा तथा आभासी प्रतिबिंब बनाता है,इसलिए इसका उपयोग हजामती दर्पण के रूप में होता है।


 10. उतल दर्पण के क्या उपयोग है ?


Ans:- उतल दर्पण के निम्नलिखित उपयोग है:-


(i) मोटरकार,स्कूटर,बस इत्यादि में “साइड-मिरर” के रूप में


(ii) सड़क या गली में स्ट्रीट-लाइट में परावर्तक के रूप मेें


11. वाहनों में उतल दर्पण का उपयोग “साइड-मिरर” के रूप में किया जाता है।क्यों ?


 Ans:- वाहनों में उतल दर्पण का उपयोग “साइड-मिरर” (पश्य दृश्य) के रूप में किया          जाता है,क्योकि यह किसी वस्तु का हमेशा सीधा प्रतिबिंब बनता है। समतल दर्पण की तुलना में उतल दर्पण पीछे की वस्तुओं तथा बड़े क्षेत्र को देखने में ज्यादा बेहतर है।


 12. समतल दर्पण का आवर्धन +1 होता है । इस कथन का क्या अभिप्राय है ?


Ans:- समतल दर्पण का आवर्धन +1 होता है। इस कथन का अभिप्राय यह है कि इसमें बनने वाले प्रतिबिंब का आकार,वस्तु के आकार के बराबर होता है। +ve चिन्ह यह बताता है कि इसमें प्रतिबिंब,वस्तु की अपेक्षा हमेशा सीधा होता है।   A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी,Manoj Sir 



13. आवर्धन(Magnification) से आप क्या समझते है ?


Ans:- प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु (बिम्ब) की ऊँचाई के अनुपात को आवर्धन कहा         जाता है। इसे m से सूचित करते है।


  m =प्रतिबिंब की ऊँचाई /वस्तु की ऊँचाई 


14. उतल दर्पण तथा अवतल दर्पण में क्या अंतर है ?


Ans:- उतल दर्पण तथा अवतल दर्पण में निम्नलिखित अंतर है :-

                   A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी


उतल दर्पण :- 


(i) इसकी परावर्तक सतह उभरी रहती है।

(ii) इसका फोकस काल्पनिक होता है।

(iii) इसे अपसारी दर्पण भी कहते है।

(iv) इससे हमेशा काल्पनिक प्रतिबिंब बनता है।

(v) इससे बना प्रतिबिंब वस्तु के आकार से छोटा है।

(vi) इसकी फोकस-दूरी तथा वक्रता-त्रिज्या धनात्मक होती है। A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी


 अवतल दर्पण :-


(i) इसकी परावर्तक धँसी रहती है।

(ii) इसका फोकस वास्तविक होता है।

(iii) इसे अभिसारी दर्पण कहते है।

(iv) इससे वास्तविक तथा काल्पनिक दोनों प्रकार के प्रतिबिंब बनता है।

(v) इससे बना प्रतिबिंब वस्तु के आकार से बड़ा,बराबर या छोटा हो सकता है।

(vi) इसकी फोकस-दूरी तथा वक्रता-त्रिज्या ऋणात्मक होती है।


  15. दर्पण-सूत्र (Mirror Formula) से आप क्या समझते है ?


 Ans:- वह सूत्र जो दर्पण की वस्तु-दूरी(u), प्रतिबिंब-दूरी(v) तथा फोकस-                             दूरी(f) के बीच संबंध को बताता है,दर्पण-सूत्र कहलाता है।


            1/v + 1/u = 1/f


A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी. 

A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी

A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी 

A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी

A ONE कोचिंग सेंटर मोतिहारी

By:- Manoj Sir & Team 

 



Post a Comment

Previous Post Next Post